क्या आप जानते हैं गायत्री मंत्र का उदय सर्वप्रथम ऋग्वेद में हुआ था

The Gayatri Mantra first emerged in the Rigveda
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परिचय :- गायत्री मंत्र का उदय सर्वप्रथम ऋग्वेद में हुआ था। इसके ऋषि विश्वामित्र है। गायत्री मंत्र की तुलना प्रणव शब्द ओम से की जाती है। हिंदू धर्म के अनुसार ओम ही सृष्टि का आधार है।

गायत्री मंत्र में ओम शब्द के मिलने से इसका संपूर्ण अर्थ उजागर होता है। शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र ऋषि-मुनियों को एक आकाशवाणी के दौरान प्राप्त हुई थी।गायत्री मंत्र को सभी मंत्रों से अत्यधिक शक्तिशाली माना जाता है। गायत्री मंत्र का नियमित रूप से जाप करने से बौद्धिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है। सृष्टि के रचयिता अर्थात ब्रह्मदेव को यह मंत्र तक प्राप्त हुआ था जब सृष्टि की रचना भी नहीं हुई थी।

गायत्री मंत्र जाप करने का समय  ,

गायत्री मंत्र का जाप करने का समय ब्रह्म मुहूर्त में शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त का शुभ समय 4:00 से 5:00 बजे के अंतराल पर होता है। अतः गायत्री मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है अर्थात इसका कोई निश्चित समय नहीं है यह प्रत्येक समय जीवो को लाभकारी फल देता है। किंतु विधि विधान के अनुसार इसका जाप करने से या अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है। नित्य कर्म कांड करने के पश्चात अथवा स्नान करने के पश्चात नियत स्थान पर सुख कर आसन में बैठकर इसका उच्चारण करने से ही अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होता है , लेकिन इसका जाप सूर्या से पूर्व किया जाना उचित माना जाता है।

 

गायत्री मंत्र के जाप करने के नियम ,

गायत्री मंत्र का जाप किसी गुरु के दिशा निर्देशों पर ही करना चाहिए तथा उचित तरीके से करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करने वाला जीव सात्विक और शुद्ध होना चाहिए अर्थात उसका भोजन सात्विक होना चाहिए अतः व तामसिक भोजन करने वाला भी व्यक्ति गायत्री मंत्र का जाप कर सकता है। गायत्री मंत्र सभी के लिए लाभकारी होता है। खुशियां चटाई यथार्थ सुख कर आसन में बैठकर गायत्री मंत्र का जाप ब्रह्म मुहूर्त में पूर्व दिशा पर तथा संध्या समय पश्चिम दिशा में करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जप करने के दौरान तुलसी या चंदन की माला का प्रयोग करना चाहिए।

 

गायत्री मंत्र की महिमा तथा इसके लाभकारी प्रभाव ,

प्राचीन ग्रंथों तथा वेदों के अनुसार गायत्री मंत्र की गणना सर्वश्रेष्ठ ग्रंथों तथा उनकी तुलना की जाती है ओम से। गायत्री मंत्र का नियमित उच्चारण करने से यह प्रखर बुद्धि और तथा सोच विचार करने की क्षमता को उच्चतम स्तर पर ले जाता है। विद्यार्थियों अथवा व्यवसाय के व्यक्तियों के लिए यह मंत्र महामंत्र साबित होता है जो उनकी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति को पूर्ण रूप से उच्चतम स्तर पर ले जाता है तथा उन्हें किसी भी जटिल समस्या का समाधान करने में पूर्ण सहायक बनता है।

निष्कर्ष :- अंततः अमिया ज्ञात होता है कि गायत्री मंत्र का नियमित जाप करने वाले जीवो की आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे वह अपनी समस्या का समाधान स्वता ही कर सकते हैं तथा उन्हें जीवन में किसी भी कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता है।

 

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